
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को सदन में स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विपक्ष की मजबूत भूमिका जरूरी है। उन्होंने कहा कि संसद में हर सदस्य को अपनी राय रखने का पूरा मौका मिलता है और कार्यवाही हमेशा निर्धारित नियमों के दायरे में ही संचालित होती है।
बिरला ने अपनी कार्यशैली पर सवाल उठाने वाले सांसदों का आभार जताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे संसदीय मर्यादा और संवैधानिक प्रतिष्ठा को कायम रखने के प्रति कटिबद्ध हैं। विपक्ष के बोलने के अवसर न मिलने के आरोपों पर उन्होंने नियमों का हवाला दिया, जिसमें स्पीकर की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
फोटो, दस्तावेज या कोई सामग्री पेश करने से पहले भी अनुमति जरूरी बताते हुए बिरला ने कहा कि विपक्ष ने अक्सर इनका उल्लंघन किया, जिससे कड़े कदम उठाने पड़े। भारत के लोकतंत्र पर गर्व करते हुए उन्होंने सदन की सहमति-असहमति की परंपरा का जिक्र किया।
सभी के लिए नियम समान हैं, चाहे प्रधानमंत्री हों। माइक ऑन-ऑफ का कोई बटन नहीं है, सदस्यों की बारी पर बोलते हैं। निलंबनों पर बिरला ने दुख जताया लेकिन नियम 377 के तहत अनुशासन आवश्यक बताया। विपक्षी महिला सांसदों के प्रदर्शन पर कार्रवाई सदन की गरिमा के लिए जरूरी थी। आगे भी परंपराओं को मजबूत करने का वादा किया।