
राज्यसभा में बुधवार को सामने आया कि देश की उत्तरी सीमाओं पर बसे दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 1085 किलोमीटर लंबी रणनीतिक सड़कों का निर्माण स्वीकृत किया गया है। इससे 136 अलग-थलग पड़े इलाके सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएंगे।
भाजपा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने ग्रामीण विकास मंत्रालय की चर्चा में कहा कि 2014 से पहले गांवों में सड़कें, पानी, स्वास्थ्य, आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। किसानों को सस्ता कर्ज, बीमा नहीं मिलता था। लेकिन अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से 8.49 लाख किमी सड़कें मंजूर, 93 फीसदी पूरी, 10,452 पुल बने।
मानसून में नदियां रास्ते रोकतीं, बच्चे स्कूल न जा पाते, मरीज इलाज से वंचित रहते। पीएम जनमन से 7324 किमी सड़कें बनाकर 2910 जनजातीय बस्तियां जुड़ीं। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में सीमावर्ती विकास पर जोर, हरित तकनीक से 1.31 लाख किमी सड़कें बनीं।
ये सड़कें न केवल सुरक्षा मजबूत करेंगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पंख लगाएंगी। भारत के गांव अब अलगाव से एकजुटता की ओर बढ़ रहे हैं।