
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अंतरराष्ट्रीय वेल्लालार सम्मेलन में राज्य की सांस्कृतिक पहचान को तोड़-मरोड़ने या नए रूप देने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया। हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि रामलिंग अडिगल वेल्लालार के करुणा, समानता, प्रेम और नैतिकता के सिद्धांतों को कमजोर करने या विभाजनकारी बनाने की चेष्टा तमिलनाडु कभी स्वीकार नहीं करेगा।
स्टालिन ने वेल्लालार की शिक्षाओं की मूल भावना को जीवित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘थनिपेरुम करुणै’ यानी अनंत करुण का सिद्धांत भूख को महामारी मानता है और गरीबों को भोजन उपलब्ध कराना सबसे बड़ा धर्म। राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं इसी दर्शन से प्रेरित हैं, जैसे स्कूली बच्चों के लिए मुख्यमंत्री नाश्ता योजना और बुजुर्गों के लिए सहायता कार्यक्रम।
मंदिरों के पुनर्निर्माण का जिक्र करते हुए सीएम ने बताया कि 4,192 मंदिरों में कुंभाभिषेक हो चुका है, जबकि 12,900 से अधिक मंदिरों में 8,100 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत कार्य तेजी से चल रहा है।
वेल्लालार की स्मृति में सात नई परियोजनाओं की घोषणा की गई, जिनमें स्मारक स्तंभ, वडालुर में प्रशिक्षण विद्यालय, थिरुवारुत्पा संगीत कक्षाएं, हर्बल गार्डन, ‘स्पिरिचुअल अल्केमी’ पुस्तक, तीन दिवसीय जयंती आयोजन, अन्नदान केंद्र, पार्क नामकरण और चेन्नई में शोध केंद्र शामिल हैं।
स्टालिन ने जोर देकर कहा कि समानता और सामाजिक न्याय महज नारे नहीं, बल्कि सरकार की नींव हैं। वेल्लालार के मानवतावादी संदेश को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की अपील की।