
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने लोकसभा से आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर भाजपा नीत केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक कदम बताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सवालों से भागने का आरोप लगाया।
बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट में स्टालिन ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को चुप कराना संसदीय लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए 2020 भारत-चीन सीमा विवाद के सवालों का जिक्र करते हुए केंद्र से जवाब मांगा।
लोकसभा में हंगामे के बीच सात कांग्रेस और एक सीपीआई(एम) सांसद को सत्र शेषकाल के लिए निलंबित किया गया। गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब के हवाले से विवादास्पद जानकारी साझा करने की कोशिश की, जिसे स्पीकर ने अनुमति नहीं दी।
स्टालिन ने निलंबन रद्द करने की मांग की और कहा कि संसद बहस का मंच है, जहां असहमति को दबाना गलत है। यह घटना बजट सत्र के दौरान हुई, जो विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनाव को उजागर करती है।
मुख्यमंत्री का बयान राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की एकजुटता को मजबूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पारदर्शिता जरूरी है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए सांसदों को बोलने का हक मिलना चाहिए।