
एआईएमआईएम नेता एसटी हसन ने दिल्ली की एक मस्जिद के आसपास हुई बुलडोजर कार्रवाई और उसके बाद हुए पथराव को पूरी तरह गलत ठहराया है। बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में हसन ने कहा कि न तो प्रशासन का यह रवैया उचित है और न ही भीड़ का हिंसक विरोध। उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
घटना दिल्ली के उत्तर-पश्चिम इलाके में घटी जहां नगर निगम की टीम ने अवैध निर्माण हटाने के लिए बुलडोजर चलाए। मस्जिद के पास मौजूद लोगों ने विरोध जताया और पुलिस पर पथराव कर दिया। कई पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि आंसू गैस और लाठीचार्ज से हालात नियंत्रण में आए।
हसन ने कहा, ‘अवैध निर्माण तो हटाने चाहिए लेकिन पूर्व सूचना के बिना बुलडोजर चलाना उचित नहीं। वहीं पथराव से हालात और बिगड़ते हैं।’ उन्होंने दिल्ली सरकार से पारदर्शी नीति बनाने और समुदायों से बातचीत की सलाह दी। यह बयान देशभर में चल रही बुलडोजर एक्शन की बहस को नई दिशा दे सकता है।
इससे पहले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी ऐसी कार्रवाइयों पर सवाल उठे हैं। मानवाधिकार संगठन इन्हें ‘बुलडोजर जस्टिस’ बता रहे हैं जबकि समर्थक इसे आवश्यक मानते हैं। दिल्ली में नगर निकाय चुनाव नजदीक होने से राजनीतिक रंग भी घुला है।
आम आदमी पार्टी ने बचाव किया कि यह नियमित अभियान था और नोटिस जारी हो चुके थे। लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिला। हसन के बयान से बहस तेज हो गई है कि विकास और संवेदनशीलता का संतुलन कैसे बने।