
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में नल्लामल्ला की पहाड़ियों पर बसा श्रीशैलम भ्रामराम्बिका मल्लिकार्जुन मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में अनोखा है। यहां भगवान शिव के साथ मां पार्वती भी शक्ति स्वरूप में विराजमान हैं, जो इसे विशेष बनाता है। यह एकमात्र ऐसा पावन स्थल है जहां संहारक शिव और सृजनकर्ता शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
देशभर से लाखों भक्त इस मंदिर पहुंचते हैं। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की महिमा अपरंपार है, वहीं भ्रामराम्बा देवी का मंदिर 18 शक्ति पीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, मां ने राक्षस अरुणासुर का वध करने के लिए मधुमक्खी का रूप धारण किया था। अरुणासुर ब्रह्मा का परम भक्त था, जिसे वरदान मिला कि कोई दो या चार पैरों वाला जीव उसे न मार सके।
अहंकारी राक्षस ने धरती-स्वर्ग पर आतंक मचाया। देवताओं की प्रार्थना पर मां पार्वती ने आठ पैरों वाली भ्रामरांबा का अवतार लिया और राक्षस का संहार किया। ‘भ्रामरांबा’ का अर्थ है मधुमक्खियों की माता।
मंदिर की वास्तुकला लुभावनी है। गोपुरम पर गणेश प्रतिमा भक्तों के कर्मों का हिसाब रखती है। परिसर में नंदी मंडप, वीरशिरोमंडप, सहस्र लिंगेश्वर, अर्धनारीश्वर, वीरभद्र, उमा महेश्वर और नवब्रह्म मंदिर हैं। भ्रामरांबा गर्भगृह में लोपामुद्रा की मूर्ति और श्री यंत्र विराजमान है। यहां मां को रेशमी साड़ी चढ़ाई जाती है।
श्रीशैलम आस्था और शांति का प्रतीक है, जहां हर भक्त को दिव्य अनुभूति होती है।