
अंतरिक्ष की शून्य गुरुत्वाकर्षण वाली दुनिया में स्पेसवॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्री अपनी जान जोखिम में डालते हैं। लेकिन उनका सबसे बड़ा रक्षक होता है स्पेससूट, जो महज कपड़े का एक जोड़ा नहीं, बल्कि एक पूरा व्यक्तिगत अंतरिक्ष यान है। यह अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर महत्वपूर्ण मरम्मत या प्रयोगों को संभव बनाता है।
अंतरिक्ष में ऑक्सीजन की कमी, तापमान का अत्यधिक उतार-चढ़ाव (-250°F से +250°F), सूर्य की घातक किरणें और माइक्रोमिटियोरॉइड्स के गोली जैसे कणों से बचाव इसी सूट का काम है। यह शुद्ध ऑक्सीजन सप्लाई करता है, कार्बन डाइऑक्साइड को फिल्टर करता है, शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है, पीने का पानी उपलब्ध कराता है और यात्री को तैरते हुए स्वतंत्र रूप से काम करने की सुविधा देता है।
सूट कई परतों से निर्मित है। कठोर ऊपरी धड़ (हार्ड अपर टॉरसो) हेलमेट, बाजुओं और बैकपैक से जुड़ता है। लचीली बाजुएं और दस्ताने कार्यों को आसान बनाते हैं। हेलमेट पर सोने की कोटिंग वाला विजर सूर्य की रोशनी से आंखें बचाता है। बूट्स विभिन्न सतहों पर पकड़ देते हैं। अंदर लिक्विड कूलिंग गारमेंट ठंडे पानी की नलियों से पसीना सोखता है।
पीठ पर लगा पोर्टेबल लाइफ सपोर्ट सिस्टम (पीएलएसएस) सूट का इंजन है। इसमें ऑक्सीजन टैंक, बैटरी, पंखे, पानी और सीओ2 क्लीनर हैं। इससे जुड़ा सेफर जेटपैक दूर बहने पर वापसी सुनिश्चित करता है। एक स्पेसवॉक में 8 घंटे तक सुरक्षित रहना संभव है।
नासा आर्टेमिस और मंगल के लिए नए सूट विकसित कर रहा है—अधिक लचीले, हल्के, धूल प्रतिरोधी। मंगल की सतह पर काम आसान होगा। ये तकनीकें अंतरिक्ष अन्वेषण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।