
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के विशालकाय बजट पर विपक्ष ने कड़ा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी के दिग्गज शिवपाल सिंह यादव ने इसे ‘कागजी बजट’ करार देते हुए सोशल मीडिया पर तंज कसा। ‘कागजी बजट मुबारक हो, जनता को सपनों का अमृत पिलाया गया,’ उन्होंने व्यंग्य किया। विज्ञापनों में विकास दौड़ रहा है, लेकिन सड़कों पर गड्ढे और बेरोजगार युवाओं की डिग्रियां अलमारियों में धूल खा रही हैं।
आंकड़ों का पहाड़ है, लेकिन गरीबों की थाली खाली। जुमलों की फसल लहलहा रही, नौकरियां मांगो तो ‘आत्मनिर्भर बनो’ कहते हैं। महंगाई आसमान छू रही, फिर भी सरकार का दावा—सब ठीक। यह बजट नहीं, महज एक इवेंट है। जनता जानती है बारी किसकी है।
कांग्रेस नेत्री आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने इसे ‘पूरी तरह शुष्क’ बताया। 9.12 लाख करोड़ के बजट में नई योजनाओं को महज 43 हजार करोड़—कम से कम 5 प्रतिशत। किसानों के लिए कोई ठोस कदम नहीं, खाद की किल्लत, बढ़ती लागत के बावजूद। कृषि वृद्धि घटी, आय दोगुनी का वादा खोखला।
आउटसोर्स कर्मियों का मानदंड, शिक्षकों का एरियर अनदेखा। पूर्वांचल-बुंदेलखंड की उपेक्षा। वित्तीय घाटा चिंता का विषय, जनता पर बोझ बढ़ सकता है। दोनों दल इसे ‘विदाई बजट’ मानते हैं। 2027 में जनता जवाब देगी।
बजट विवाद ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। वादों और हकीकत के बीच की खाई साफ नजर आ रही है। क्या सरकार सुधरेगी?