भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में एक बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने स्वदेशी कवच ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली के 487 किलोमीटर लंबे रूट पर क्षेत्रीय परीक्षण पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि देश के विशाल रेल नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।

कई महीनों तक चले इन परीक्षणों में उच्च गति, बदलते मौसम और भारी ट्रैफिक जैसी विविध परिस्थितियों का सामना किया गया। कवच प्रणाली ने काल्पनिक टक्कर की स्थितियों में स्वतः ब्रेक लगाकर अपनी प्रभावशीलता सिद्ध की। ट्रेनों और ट्रैकसाइड उपकरणों के बीच संचार में कोई त्रुटि नहीं पाई गई।
एससीआर के अधिकारियों ने बताया कि यह 487 किमी खंड अब पूरी तरह कवच के लिए तैयार है। राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप 2025 तक 2000 इंजनों और 44,000 किमी ट्रैक पर कवच लगाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत तक कमी आएगी।
अमृत भारत जैसी योजनाओं के तहत एससीआर का यह प्रयास ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देता है। आने वाले समय में अन्य रूटों पर भी कवच का विस्तार होगा, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और तेज यात्रा का लाभ मिलेगा।
