
गांधीनगर: विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने के लिए गुजरात सरकार छोटे शहरों के सर्वांगीण विकास पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में राज्य में अक्टूबर 2025 तक पांच सैटेलाइट टाउन विकसित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। ये सैटेलाइट सिटी बड़े महानगरों के पास स्थित होंगे, जो आर्थिक बोझ कम करने और रोजगार सृजन में मील का पत्थर साबित होंगे।
इन शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के शहरी योजनाकारों को आमंत्रित किया गया है। टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगले दो महीनों में कंसल्टेंट नियुक्त हो जाएंगे। एक साल के अंदर ये विशेषज्ञ पांचों शहरों के लिए विस्तृत मास्टर प्लान प्रस्तुत करेंगे। 2030 तक इन सैटेलाइट टाउनों में महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिसमें विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक बस सेवा, जलापूर्ति, वेस्ट मैनेजमेंट, रिंग रोड, अर्बन फॉरेस्ट पार्क, मॉडल फायर स्टेशन और मिक्स्ड यूज डेवलपमेंट शामिल हैं।
चुने गए शहर हैं: अहमदाबाद के पास साणंद, वडोदरा के पास सावली, गांधीनगर के पास कलोल, सूरत के पास बारडोली और राजकोट के पास हीरासर। ये सभी बड़े शहरों से मात्र एक घंटे की दूरी पर हैं, जहां परिवहन, उद्योग, पर्यटन, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक विकास होगा। इस पहल से टियर-2 और टियर-3 शहर आर्थिक केंद्र बनेंगे, स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने शहरी विकास पर जोर देते हुए कहा कि शहर देश के विकास के इंजन हैं। टियर-2 व टियर-3 शहरों में दो लाख से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें महिलाओं का नेतृत्व उल्लेखनीय है। इन शहरों की अपार क्षमता का उपयोग कर गुजरात विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। यह सैटेलाइट टाउन परियोजना न केवल शहरीकरण को संतुलित करेगी बल्कि ‘अर्निंग वेल-लिविंग वेल’ के मंत्र को साकार भी करेगी।