
सनातन धर्म में पंचांग का महत्व अपरिमेय है, जो शुभ कार्यों के लिए सटीक मार्गदर्शन प्रदान करता है। माघ मास का अंतिम प्रदोष व्रत 30 जनवरी को शुक्रवार को है, जिसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह भगवान शिव की विशेष आराधना का अवसर है।
दृक पंचांग के अनुसार, शुक्ल द्वादशी सुबह 11:09 तक रहेगी, फिर त्रयोदशी प्रारंभ होगी, जो प्रदोष के लिए उत्तम है। चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेगा, आर्द्रा नक्षत्र 31 जनवरी सुबह 3:27 तक प्रभावी रहेगा।
शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 से 6:18, अभिजीत दोपहर 12:13 से 12:56, अमृत काल शाम 6:18 से 7:46 तक। वैधृति योग शाम 4:58 तक, सूर्योदय 7:10, सूर्यास्त 5:59 बजे।
राहुकाल सुबह 11:14 से दोपहर 12:35, यमगण्ड दोपहर 3:17 से 4:38, गुलिक काल सुबह 8:31 से 9:52 तक अशुभ। इनसे बचें।
यह व्रत महादेव व माता पार्वती की कृपा प्राप्ति का साधन है। प्रदोष काल में शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग अर्पित कर पाठ से मनोकामनाएं साकार होती हैं। शुक्रवार होने से वैवाहिक सुख, धन लाभ विशेष फलदायी। विष्णुप्रिया पूजन भी शुभ। भक्तों के लिए यह दिव्य अवसर है।