
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनियमित दिनचर्या शारीरिक परेशानियों को न्योता दे रही है। खासकर गर्दन और पीठ का दर्द आम हो गया है। लेकिन स्कन्ध तथा बाहुमूल-शक्ति-विकासक नामक यह योग क्रिया चमत्कारिक राहत देती है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा द्वारा प्रचारित यह सूक्ष्म व्यायाम कंधों, बाहुओं और ऊपरी शरीर को मजबूत करने पर केंद्रित है।
नियमित अभ्यास से मांसपेशियां ठोस बनती हैं, ऊपरी पीठ, गर्दन व कंधों में लचक आती है। तनाव भागता है और गहरी शांति मिलती है। पेट, नितंब व जांघों की मांसपेशियां सक्रिय रहकर संतुलन व स्थिरता बढ़ाती हैं। कंधों का दर्द, गर्दन की खराबी व पीठ की तकलीफ में जबरदस्त सुधार होता है। कंधे आकर्षक व मजबूत हो जाते हैं।
घर पर आसानी से करने योग्य यह आसन पोस्चर दुरुस्त करता है, थकान मिटाता है। ताड़ासन में खड़े होकर ठोड़ी छाती से सटाएं, मुट्ठी बांधें। सांस भरते कंधे कान तक ऊपर उठाएं, 3 सेकंड रोकें, सांस छोड़ते नीचे लाएं। 5-10 बार दोहराएं, गति नियंत्रित रखें।
योगाचार्य बताते हैं कि यह शारीरिक बल के साथ मानसिक सुकून भी लाता है। रोजाना अपनाकर कंधों की जकड़न व थकान से आजादी पाएं।