
दिल्ली की कर्करदूमा अदालत में दिल्ली दंगों के बड़े साजिश मामले की सुनवाई के दौरान शरजील इमाम के वकील ने कड़ी दलीलें पेश कीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके मुवक्किल ने कभी हिंसा का समर्थन नहीं किया, बल्कि हर जगह अहिंसा और शांतिपूर्ण विरोध की बात की।
वकील ने शाहीन बाग और जामिया मिलिया इस्लामिया में दिए गए भाषणों के अंशों का हवाला दिया। ‘शरजील ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ अहिंसक सत्याग्रह की अपील की थी। असम को भारत से अलग करने जैसी बातें रूपक थीं, हिंसा की साजिश नहीं,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
महात्मा गांधी के सिद्धांतों का सहारा लेते हुए वकील ने तर्क दिया कि इमाम के शब्दों में कोई उकसावा नहीं था। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इन भाषणों ने फरवरी 2020 के दंगों को भड़काया, जिसमें 53 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए।
यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजद्रोह कानून के बीच संतुलन पर सवाल उठाता है। कोर्ट ने जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अन्य यूपीए मामलों के लिए मिसाल बनेगा।