
वाराणसी में बच्चों से यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के घेरे में फंसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके पद की गरिमा बनाए रखने हेतु बड़े स्तर पर निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च पद पर ऐसी बदनामी गलत है। मामले की गहन जांच होनी चाहिए ताकि सनातन धर्म की इस परंपरा का मान बरकरार रहे।’ यूपी पुलिस पर भरोसे की कमी जताते हुए उन्होंने गैर-भाजपा राज्यों की पुलिस कमेटी गठित करने का सुझाव दिया।
पुलिसवालों संग वायरल फोटोज को एआई जनरेटेड बताते हुए उन्होंने स्रोत की जांच की मांग की। ‘ये फर्जी तस्वीरें हमारी छवि खराब करने का प्रयास हैं, इनकी उत्पत्ति पता लगे।’
आशुतोष ब्रह्मचारी पर 21 लाख इनाम के बयान को उन्होंने संतों के आक्रोश का इजहार बताया। ‘हमारे धर्म में हिंसा का स्थान नहीं, यह मात्र शब्दों में व्यक्त गुस्सा है।’
जांच प्रगति पर है और शंकराचार्य आशावादी हैं कि सत्य जल्द सामने आएगा। यह विवाद धार्मिक नेतृत्व और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन पर सवाल उठाता है।