
हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय गीत ‘दिल चाहता है’, ‘मां’ और ‘कल हो ना हो’ जैसे सुपरहिट्स देने वाले शंकर महादेवन का नाम हर संगीत प्रेमी की जुबान पर है। कर्नाटक परिवार में 3 मार्च को जन्मे शंकर ने कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन संगीत ने उन्हें हमेशा लुभाया।
बचपन से शास्त्रीय संगीत की तालीम लेते हुए कॉलेज स्तर पर वे स्टेज के सितारे बन चुके थे। हर आयोजन में उनकी प्रस्तुति और सम्मान जीतने की कला सबको मंत्रमुग्ध कर देती। लेकिन करियर का टर्निंग पॉइंट आया उनके पहले एल्बम ‘ब्रेथलेस’ के साथ, जिसके बोल जावेद अख्तर ने लिखे।
यह गाना बिना रुके, बिना सांस लिए गाया गया था। स्क्रिप्ट हाथ में आते ही शंकर हैरान रह गए—चार पेज शब्दों से भरे, जैसे कोई लेख। धुन तैयार थी, लेकिन चुनौती कठिन। जावेद साहब ने हंसते हुए कहा, ‘यही तो ब्रेथलेस है।’ एक ही टेक में रिकॉर्डिंग पूरी हुई।
‘ब्रेथलेस’ ने धूम मचा दी। स्क्रीन अवॉर्ड्स में बेस्ट नॉन-फिल्म एल्बम का खिताब मिला और बॉलीवुड के दरवाजे खुल गए। सलमान खान की ‘दस’ से फिल्मी सफर शुरू हुआ, लेकिन शंकर-एहसान-लॉय की तिकड़ी ने इतिहास रचा।
यह तिकड़ी बैंड की तरह काम करती है। ‘दिल चाहता है’ से लेकर तमाम ब्लॉकबस्टर्स तक उनके संगीत ने दर्शकों को बांधा। आज भी वे नए प्रयोग कर रहे हैं। शंकर का यह सफर साबित करता है कि जुनून से कुछ भी हासिल संभव है।