
नई दिल्ली। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की बुधवार जारी रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में पूंजीगत व्यय को 10 प्रतिशत बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर सकती है। यह कदम देश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति प्रदान करेगा।
हाईवे, रेलवे, बंदरगाह और बिजली क्षेत्रों में भारी निवेश से आर्थिक विकास को बल मिलेगा। नई नौकरियां सृजित होंगी और निजी क्षेत्र का निवेश भी प्रोत्साहित होगा। वैश्विक मंदी के दौर में यह रणनीति भारत को मजबूत बनाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बीच भारत को वित्तीय अनुशासन बनाए रखना होगा। कोरोना के बाद की रिकवरी वैश्विक वित्तीय संकट से बेहतर रही है।
कर राजस्व में मामूली वृद्धि, गैर-कर राजस्व स्थिर रहने का अनुमान है। नाममात्र जीडीपी वृद्धि 10.5-11 प्रतिशत रहेगी, जिसमें वस्तु मूल्यों की बढ़ोतरी असर डालेगी। राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.2 प्रतिशत रह सकता है।
केंद्र की शुद्ध उधारी 11.7 लाख करोड़, राज्य सरकारों की 12.6 लाख करोड़ रहने की संभावना। आरबीआई को ओएमओ बढ़ाने पड़ सकते हैं।
बचत बढ़ाने के लिए बैंक जमा ब्याज पर पूंजीगत लाभ कर जैसी व्यवस्था, एफडी लॉक-इन 3 वर्ष, टीडीएस सीमा बढ़ाने की सिफारिश। जीएसटी में आईएसडी परिभाषा सुधार, बैंकिंग सेवाओं पर टीडीएस मुक्त। बीमा-पेंशन में विस्तार जरूरी।
राज्यों पर कर्ज बोझ अधिक है, इसलिए जीएसडीपी आधारित मध्यम अवधि की उधारी योजनाएं स्पष्ट हों। केंद्रीय बजट में इस पर जोर दें।
यह रिपोर्ट बजट निर्माण में दिशा प्रदान करेगी, जो विकास और स्थिरता का संतुलन साधेगी।