
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। विपक्षी नेताओं ने इस प्रस्ताव को इतिहास के अपमान करार देते हुए तीखी आलोचना की है।
सीपीआई(एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि सावरकर को आजादी की लड़ाई में योगदान के लिए नहीं, बल्कि ब्रिटिशों से माफी मांगने के लिए याद किया जाता है। उन्होंने सावरकर को नफरत की राजनीति और समाज को बांटने का प्रतीक बताया। यदि उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान मिला तो यह राष्ट्र के इतिहास का काला अध्याय होगा।
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी कड़ा विरोध जताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि माफी मांगने वालों को भारत रत्न देने की परंपरा चली तो सबको मिलना पड़ेगा। क्या हम अपने बच्चों को सिखाएंगे कि संघर्ष के बजाय दमनकारियों से झुक जाना चाहिए? देशवासी ऐसी मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
राय ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के यूपी वाले बयान पर भी चुटकी ली। ओवैसी के ‘योगी जी मैं आ रहा हूं’ पर उन्होंने कहा कि कहना चाहिए- योगी जी मुझे भेजा जा रहा है, ध्यान रखना।
एआईएमआईएम के यूपी अध्यक्ष के बुर्का वाली महिला सीएम वाले बयान पर राय बोले, पहले खुद विधायक बनो, फिर मुख्यमंत्री बनने की सोचो।
सावरकर का विवादास्पद व्यक्तित्व- काला पानी की सजा से लेकर हिंदुत्व विचारक तक- हमेशा बहस का विषय रहा है। यह मांग राजनीतिक ध्रुवीकरण को नई ऊंचाई दे रही है, जो आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकती है।