
केरल की राजनीति में एक बार फिर ड्रामा देखने को मिला जब सतीशन ने सीपीआई-एम की दोहरी नीति पर जोरदार हमला बोला। वरिष्ठ नेता केएम मणि पर पहले अपमान और अब सम्मान की राजनीति को बेनकाब करते हुए सतीशन ने लेफ्ट फ्रंट की पोल खोल दी।
कुछ साल पहले सीपीआई-एम ने मणि पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। रैलियों में उनके खिलाफ नारेबाजी हुई, मीडिया में बदनामी की होड़ लगी। मणि को विधानसभा से इस्तीफा देने की मांग तेज हो गई थी। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।
लेफ्ट नेता अब मणि से गठबंधन की बात कर रहे हैं। हालिया बैठकों में उनकी तारीफों के पुल बांधे जा रहे हैं। सतीशन ने एक सभा में कहा, ‘अपमान से सम्मान तक का यह सफर राजनीति की कालिख को उजागर करता है।’ उनकी बातें लोगों में गूंज रही हैं।
यह घटना केरल की जटिल गठबंधन राजनीति को दर्शाती है। मणि की केरल कांग्रेस (एम) के पास महत्वपूर्ण सीटें हैं, जो विधानसभा चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती हैं। सतीशन ने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां वोटरों का विश्वास तोड़ेंगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीपीआई-एम का यह दांव चुनावी लाभ के लिए है। लेकिन सतीशन की आलोचना से पार्टी की छवि पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होगा। केरल की जनता अब ऐसी राजनीति से तंग आ चुकी है। सतीशन का यह हमला लेफ्ट के लिए खतरे की घंटी है।