
महाराष्ट्र के सतारा में विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने मंगलवार को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के सोशल सिक्योरिटी अधिकारी स्वप्निल जाधव को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें एक वर्ष के सश्रम कारावास और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
यह फैसला ट्रायल के दौरान पेश किए गए मजबूत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर आधारित है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपी को सजा सुनाई गई।
केस की शुरुआत 28 मार्च 2016 को हुई जब सीबीआई को एक फर्म मालिक की लिखित शिकायत मिली। शिकायत में आरोप था कि जाधव ने 10 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना पंजीकरण के रखने के उल्लंघन पर 3 लाख रुपये की पेनल्टी माफ करने के बदले 30,000 रुपये रिश्वत मांगे। बातचीत के बाद रकम 25,000 रुपये पर तय हुई।
सीबीआई ने उसी दिन जाल बिछाया और जाधव को एक बिचौलिए के जरिए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के बाद 28 जून 2016 को चार्जशीट दाखिल हुई।
अदालत ने स्वप्निल जाधव को दोषी पाया, लेकिन सह-आरोपी अभिजीत जाधव को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत संदेश देता है। छोटे कारोबारियों को ऐसी सेध से बचाने में सीबीआई की भूमिका सराहनीय रही।