
मध्य प्रदेश के धार जिले में विवादित भोजशाला परिसर में शुक्रवार को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सरस्वती पूजा भारी सुरक्षा घेरे के बीच प्रारंभ हो गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त देवी के दर्शन को पहुंचे, तो वहीं प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान हिंदुओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति दी, जबकि मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा करने का समय दिया। इस फैसले से विवादित स्थल पर तनाव कम करने की उम्मीद है।
11वीं शताब्दी का यह एएसआई संरक्षित स्मारक हिंदुओं के लिए वाग्देवी मंदिर है, वहीं मुस्लिम इसे कमल मौला मस्जिद मानते हैं। 2003 के एएसआई इंतजाम के तहत मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज होती रही है।
धार जिला प्रशासन ने 8,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और आरएएफ की टुकड़ियों को तैनात किया है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है। धार्मिक नफरत फैलाने वाली किसी भी सामग्री पर भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर बसंत पंचमी की बधाई दी, मां सरस्वती की कृपा से सभी के जीवन में ज्ञान, सृजनशीलता, सुख और समृद्धि की कामना की।
मुस्लिम भक्तों के नमाज समय के साथ सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है। यह आयोजन धार्मिक सद्भाव का प्रतीक बने, यही अपेक्षा है।