
महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र की शुरुआत होते ही राजनीतिक घमासान मच गया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महायुति सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए विधानसभा और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद रिक्त होने को लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करार दिया है।
सोमवार को मुंबई में आयोजित प्रेस वार्ता में राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि बिना विपक्ष के नेता के सदन चलाना संविधान का अपमान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसदीय प्रणाली में यह पद सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।
राउत ने सवाल उठाया कि सरकार के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद विपक्षी नेता की नियुक्ति क्यों नहीं हो रही? उनका मानना है कि यह जानबूझकर संस्थागत संतुलन बिगाड़ने की साजिश है, जो सत्ता के असीमित विस्तार को जन्म दे सकती है।
उन्होंने बताया कि लोकसभा, राज्यसभा और अन्य राज्यों की विधानसभाओं में यह पद हमेशा भरा रहता है, लेकिन महाराष्ट्र में बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में यह खाली है— ऐसी स्थिति अभूतपूर्व है। विपक्ष लंबे समय से इसकी मांग कर रहा है, मगर तकनीकी बहानों से टाल दिया जा रहा है।
राउत ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान न हुआ तो कानूनी लड़ाई के साथ जनता के दरवाजे भी खटखटाए जाएंगे। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि संख्या बल होने पर भी आधिकारिक विपक्षी आवाज से डर क्यों? यह लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है।
सत्र के दौरान इस विवाद ने बहस को तीव्र बना दिया है। विपक्ष सदन में हंगामा करने और बजट चर्चा को प्रभावित करने की तैयारी में जुटा है, जबकि सत्ता पक्ष चुप्पी साधे हुए है। यह मुद्दा महाराष्ट्र की सियासत को नई दिशा दे सकता है।