
रमजान का पाक महीना चल रहा है और ईद का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। फिल्म जगत में ईद हमेशा से ब्लॉकबस्टर रिलीज का सुनहरा मौका रही है, खासकर सलमान खान की फिल्में जो बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाती हैं। लेकिन इस बार याद आ रहे हैं सलीम खान, सलमान के पिता और दिग्गज लेखक, जो मुंबई के लीलावती अस्पताल में माइनर ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती हैं।
‘शोले’, ‘दीवार’, ‘जंजीर’ जैसी अमर फिल्मों के रचयिता सलीम खान अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर हैं। जब फिल्मों पर फतवा देने वाले उभरे, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि फतवा सिर्फ बनाने वालों पर क्यों, देखने वालों पर क्यों नहीं? ईद पर जो भीड़ उमड़ती है, वो कहीं और नहीं दिखती। मुसलमान सबसे ज्यादा फिल्में देखते हैं, ये साबित होता है।
सलीम ने इस्लाम की मूल शिक्षा पर जोर दिया—इंसानियत, मोहब्बत, नफरत या बदले की नहीं। ईद पर फिल्में परिवार के साथ उत्सव का हिस्सा हैं, धार्मिक भावना से टकराव का नहीं। उन्होंने कहा कि अगर हर फिल्म देखने वाले पर फतवा लगे, तो उद्योग खुद-ब-खुद बंद हो जाएगा।
उनके घर में हर धर्म का सम्मान है—सलमान की मां हिंदू हैं, गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाते हैं। सलीम का ये रुख आज भी प्रासंगिक है, जो एकता और सौहार्द की मिसाल पेश करता है। स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ, उनकी ये बातें हमें सोचने पर मजबूर करती हैं।