
प्रयागराज के संगम घाट पर शंकराचार्य पद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अधिकारियों के बीच हुई तीखी बहस ने पूरे संत समाज को चिंतित कर दिया है। नासिक से संत महंत रामस्नेही दास और महंत बैजनाथ ने शांति और संयम का परिचय देते हुए अपील की है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों का हल टकराव से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और संवाद से होना चाहिए।
महंत बैजनाथ, जो गुरु नित्यानंद गोपाल दास के शिष्य हैं, ने कहा कि शंकराचार्य आध्यात्मिक जगत के सर्वोच्च नेता हैं। उनके नाम से जुड़े विवाद से बचना चाहिए। उन्होंने ब्राह्मण बच्चों के साथ दुर्व्यवहार को गलत ठहराया और वरिष्ठ शंकराचार्य से बुद्धिमत्ता से मार्गदर्शन की अपेक्षा की।
महंत रामस्नेही दास ने माघ मेला के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल स्नान तक सीमित नहीं, बल्कि संतों की सभा, मंदिर सेवा और गंगा स्नान के लिए चयनित श्रद्धालुओं की पवित्रता है। संतों को हमेशा विनम्र रहना चाहिए और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठना चाहिए।
दोनों ने आध्यात्मिक परंपराओं की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया। समाज संतों से नैतिक मार्गदर्शन की आशा रखता है, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाना आवश्यक है।
संगम घटना के बाद देशव्यापी चर्चा के बीच यह अपील श्रद्धालुओं और समाज की शांति की कामना को साकार करने वाली है।