
प्रयागराज, 27 जनवरी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। नेताओं के बाद अब उत्तर प्रदेश के साधु-संत भी मैदान में उतर आए हैं। कई जिलों में संतों ने इन नियमों को रद्द करने की जोरदार मांग उठाई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई जाति जन्मजात अन्यायी नहीं होती। हर समुदाय में गुणवान और अवगुणी दोनों मौजूद रहते हैं। उन्होंने यूजीसी पर प्रहार करते हुए चेताया कि ये नियम एक जाति को दूसरी के विरुद्ध खड़ा कर रहे हैं, जिससे हिंदू समाज को गहरा आघात लगेगा। इसलिए इन्हें शीघ्र वापस लिया जाए।
स्वामी जी ने इसे हिंदू समाज को तोड़ने की साजिश करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार क्यों एक जाति को दूसरी से भिड़वाना चाहती है? यह कैसा शासन है जो आपसी कलह को बढ़ावा देता है?
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर टिप्पणी करते हुए स्वामी ने कहा कि यह कदम सनातन धर्मानुयायियों के हृदय विदारक दर्द को दर्शाता है। यह ऐतिहासिक घटना उत्तर प्रदेश सरकार के कदमों की निंदा करेगी।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नियम वापसी की अपील की। उन्होंने कहा कि या तो नियम रद्द हों या उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। सामान्य वर्ग की 35 प्रतिशत लड़कियों को ये नियम शोषण की चपेट में धकेल देंगे, अपराध बढ़ेंगे और शिक्षा का अधिकार छिन जाएगा।
संतों का यह आंदोलन उच्च शिक्षा नीति पर सवाल खड़े करता है। सरकार को चाहिए कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखते हुए सुधार करे, वरना विवाद और गहरा सकता है।