
अयोध्या से उठी संत समाज की एकजुट आवाज ने ‘द केरल स्टोरी 2’ के टीजर को मजबूत आधार दिया है। कामाख्या नारायण सिंह के निर्देशन में बनी इस फिल्म का प्रोमो हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण की मार्मिक कहानी बयां करता है, जो प्यार के जाल में फंसाने की सच्चाई दिखाता है।
टीजर रिलीज होते ही विरोध की हवा चली, लेकिन संतों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा, ‘लव जिहाद चरम पर है। हिंदू बेटियां जन्म से खतरे में हैं। दिल्ली में 6 साल की मासूम के साथ एक खास समुदाय के लोगों ने घिनौना अपराध किया। ऐसे विरोधी देश को तबाह करना चाहते हैं। इनकी महिलाओं के प्रति गंदी सोच है। सरकार को सख्त क़ानून बनाना चाहिए।’
सीताराम दास महाराज ने सवाल दागा, ‘सच्चाई दिखाने में क्या गुनाह? हमारी बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर बनने के सपने देखती हैं, लेकिन इन जालों में फंस जाती हैं। विरोध करने वाले आतंकवादी और देशद्रोही हैं, इन्हें देश में रहने का अधिकार नहीं।’
नासिक से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने अपील की, ‘पहली फिल्म ने जिहादियों के काले कारनामे उजागर किए। ये तरह-तरह के जिहाद फैला रहे हैं। सनातनी भाइयों, सावधान रहें। ये हमारे नहीं हो सकते। फिल्म जरूर देखें, ये जिहाद का पर्दाफाश है।’
ऋषिकेश के स्वामी नारायण दास ने भी सराहना की। ‘जबरन धर्म परिवर्तन महापाप है। फिल्म दिखाती है कि कैसे जिहादी हमारी बेटियों को शिकार बनाते हैं। इस मानसिकता का साथ देना भी पाप है।’
संतों का यह समर्थन समाज में लव जिहाद के खिलाफ जागरूकता फैला रहा है। फिल्म रिलीज होने पर बहस और तेज होगी।