
नई दिल्ली में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश होने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने रुपए की गिरावट को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं की तरह ही कमजोर हो रहा है, क्योंकि सभी समान भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
गुरुवार को रुपया 91.94 के स्तर पर 0.12 पैसे लुढ़क गया। सोने के बढ़ते दामों से आयात बिल फूल रहा है, जो दबाव बढ़ा रहा है। फिर भी नागेश्वरन आशावादी हैं। उन्होंने पिछले 12-18 महीनों में केंद्र-राज्य स्तर पर हुए संरचनात्मक सुधारों का जिक्र किया।
‘अगर निर्यात वृद्धि बनी रही और सुधारों का सिलसिला जारी रहा, तो रुपए पर निवेशकों की नजर बदलेगी,’ उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती विकास दर को 7.5-8 प्रतिशत तक ले जा सकती है, जो सर्वेक्षण के 7 प्रतिशत के अनुमान से बेहतर है।
नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि अल्पकालिक घटनाएं नियंत्रण से बाहर हो सकती हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादें निवेशकों को आकर्षित करेंगी। यह बयान बाजार को स्थिरता का संदेश देता है।