
परिवार के सदस्यों की गहरी चालबाजी ने रोहिणी आचार्य की भव्य विरासत को चूर-चूर कर दिया। दशकों की मेहनत से खड़ी यह संपत्ति अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है, जो पारिवारिक विश्वासघात की एक मार्मिक मिसाल पेश करती है।
रोहिणी ने अपने रिश्तेदारों पर पूर्ण भरोसा किया था, लेकिन ईर्ष्या और लालच ने उन्हें अंधा कर दिया। उन्होंने वित्तीय दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की, अफवाहें फैलाईं और कानूनी जाल बिछाकर नियंत्रण हथियाने की कोशिश की।
परिणामस्वरूप मूल्यवान जमीनें, कारोबारी साझेदारियां और पारिवारिक ट्रस्ट सब कुछ हाथ से निकल गया। अदालती लड़ाइयां लंबी खिंचीं, लेकिन नुकसान अपूरणीय हो चुका था।
समाज में रोहिणी को एक मजबूत स्तंभ के रूप में जाना जाता था। अब वे इस धोखे से उबरने की जद्दोजहद में हैं। जांचें तेज हो रही हैं और उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी। यह घटना परिवारों को सतर्क रहने की सीख देती है।
रोहिणी की कहानी साबित करती है कि खून के रिश्ते भी कभी-कभी सबसे खतरनाक साबित हो सकते हैं। उनकी हिम्मत आने वाले दिनों में नई शुरुआत का आधार बनेगी।
