
पटना में गुरुवार को राजनीतिक तापमान अचानक चढ़ गया जब राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रवक्ता एजाज अहमद ने विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की सुरक्षा में कथित कमी पर एनडीए सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने इसे विपक्ष की आवाज को कुचलने की सुनियोजित चाल करार दिया।
अहमद ने कहा कि यह कदम लोकतंत्र-विरोधी सोच को उजागर करता है। तेजस्वी के आंदोलनों से पहले ही सुरक्षा घटाना सरकार की घबराहट का प्रमाण है। वे बिहार में रोजगार, विकास, महिलाओं की सुरक्षा, अपराध और हत्याओं जैसे गंभीर मुद्दों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं, जिससे सत्ताधारी दलों में हड़कंप मच गया है।
आरजेडी नेता ने पटना में नीट परीक्षा के दौरान एक छात्रा की मौत के मामले से इसे जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। सवाल यह है कि भाजपा और जदयू नेताओं को जेड-प्लस सुरक्षा क्यों, जबकि तेजस्वी की वाई-प्लस कर दी गई?
संशोधित सूची में नितिन नबीन, मंगल पांडे, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह जैसे नेताओं को जेड श्रेणी की मजबूत सुरक्षा मिली है, जिसमें कमांडो दस्ते शामिल हैं। वहीं तेजस्वी और गिरिराज सिंह को वाई-प्लस दी गई।
अधिकारियों का कहना है कि यह सुरक्षा ऑडिट और खतरे के मूल्यांकन पर आधारित है। लेकिन आरजेडी इसे राजनीतिक प्रतिशोध मानती है। तेजस्वी जननेता बने रहेंगे और जनहित में बोलते रहेंगे। यह विवाद बिहार की राजनीति को और गरमा सकता है।