
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संसद भवन में दोनों सदनों को संबोधित करने के दौरान विपक्षी सांसदों के हंगामेबाजी भरे रवैये पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इसे पूरे देश के लिए लज्जास्पद करार देते हुए कहा कि जनता कभी माफ नहीं करेगी।
मीडिया से बातचीत में रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में वंदे मातरम के 150वें वर्षगांठ और महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि दी जा रही थी। उसी समय विपक्ष के सदस्य नारेबाजी में लगे थे। गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व पर उनके बलिदान की याद दिलाते हुए राष्ट्रपति ने प्रेरणा लेने का आह्वान किया, लेकिन हंगामा जारी रहा।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, पर राष्ट्रपति के गरिमामय संबोधन के समय ऐसा आचरण अस्वीकार्य है। जिम्मेदार सांसद ऐसा नहीं करते। संसद देश का सर्वोच्च मंदिर है, जहां सभी को मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
रिजिजू ने विपक्ष से आत्मचिंतन की अपील की। राष्ट्रपति का भाषण केवल सरकार का नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकजुट आवाज है। ऐसे अवसरों पर एकता का परिचय देना चाहिए। यह घटना संसदीय परंपराओं पर सवाल खड़े करती है और लोकतंत्र की मजबूती के लिए सबक है।