
नई दिल्ली। कांग्रेस द्वारा चीनी घुसपैठ के आरोप लगाने और पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब पर विवाद खड़ करने के जवाब में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रक्षा संबंधी मामलों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए रिजिजू ने वर्तमान सरकार के अनुभवी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने 1962 युद्ध की हेंडरसन ब्रूक्स-भगत कमीशन रिपोर्ट का जिक्र किया, जो नेहरू सरकार को चीनी सेना के हाथों मिली करारी हार का जिम्मेदार ठहराती है। ‘हमारी सरकार ने इसे कभी सार्वजनिक नहीं किया, क्योंकि रक्षा को राजनीति का शिकार नहीं बनने देंगे,’ उन्होंने लिखा।
रिजिजू ने अपना एक पुराना वीडियो भी साझा किया, जिसमें वे चीन सीमा पर भारतीय सैनिकों के साथ चीनी सैनिकों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। यह 1 नवंबर 2024 का पोस्ट था, जब वे सैनिकों संग दीवाली मना रहे थे।
इधर, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नेहरू-गांधी परिवार के काले कारनामों पर केंद्रित पुस्तकालय खोलने का ऐलान किया। वीडियो संदेश में उन्होंने भ्रष्टाचार, नीतिगत गलतियों और बंटवारे जैसे मुद्दों पर किताबें संग्रहित करने की योजना बताई। ‘संसद में मेरी बातों पर देशव्यापी प्रतिक्रिया मिली, अब यह लाइब्रेरी शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर बनेगी,’ उन्होंने कहा। दुबे ने लोगों से किताबों के सुझाव मांगे।
यह विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा और ऐतिहासिक जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छेड़ रहा है, जहां सत्ताधारी दल पारदर्शिता और संयम का संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रहा है।