
नई दिल्ली में 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड का इंतजार पूरे देश को है। इस बार गृह मंत्रालय की झांकी सबसे ज्यादा चर्चा में रहेगी, जो देशभर में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। यह झांकी आधुनिक तकनीक से लैस न्याय व्यवस्था की कहानी बयां करेगी।
1 जुलाई 2024 से प्रभावी भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम इन कानूनों ने पुराने उपनिवेशवादी कानूनों को अलविदा कह दिया है। ये कानून भारतीय दर्शन पर आधारित न्याय की अवधारणा को मजबूत करते हैं, जो सजा से ज्यादा सुधार पर जोर देते हैं।
झांकी में डिजिटल सबूत संग्रह के लिए ई-साक्ष्य, बायोमेट्रिक पहचान के लिए राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट सिस्टम (एनएएफआईएस), डिजिटल साइन वाले ई-समन और वर्चुअल सुनवाई जैसी विशेषताएं प्रमुख होंगी। पुलिस से लेकर अदालत और जेल तक का इंटरऑपरेबल सिस्टम दिखाया जाएगा।
मोबाइल फोरेंसिक वैन, कंट्रोल रूम, सीसीटीवी निगरानी और महिला पुलिसकर्मियों की सक्रिय भूमिका त्वरित प्रतिक्रिया का प्रतीक होंगी। सामुदायिक सेवा को सुधारात्मक सजा के रूप में शामिल करना प्रगतिशील सोच को दर्शाएगा।
बहुभाषी कानून पुस्तिकाएं सभी के लिए समावेशी कानून व्यवस्था की प्रतिबद्धता दिखाएंगी। यह झांकी न केवल कानूनी सुधारों का जश्न मनाएगी, बल्कि विकसित भारत की न्यायिक यात्रा को प्रेरित भी करेगी।