
भारतीय रिजर्व बैंक ने डेक्कन डिजिटल नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत लंबे समय से चल रही कार्रवाई को कंपाउंडिंग आदेश के जरिए समाप्त कर दिया है। 14 जनवरी 2026 को धारा 15 के तहत जारी इस आदेश ने कंपनी पर सभी आगे की कानूनी कार्यवाहियों का अंत कर दिया।
प्रवर्तन निदेशालय को विश्वसनीय सूचना मिलने पर फेमा नियमों के उल्लंघन की आशंका हुई थी। विस्तृत जांच के बाद 27 दिसंबर 2012 को धारा 16 के तहत शिकायत दर्ज की गई, जिसमें विदेशी निवेश की रिपोर्टिंग में देरी का आरोप था।
जांच में सामने आया कि कंपनी ने करीब 11.82 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि समय पर रिपोर्ट नहीं की। साथ ही शेयर जारी करने के बाद अनिवार्य एफसीजीपीआर फॉर्म भी तय समय में जमा नहीं किया। फेमा के तहत ये प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूरी करना जरूरी है।
16 जनवरी 2013 को कंपनी, निदेशकों और अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। इसके जवाब में कंपनी ने आरबीआई के पास कंपाउंडिंग के लिए आवेदन किया। ईडी की सहमति के बाद आरबीआई ने 1,03,333 रुपये के भुगतान पर मामला निपटा लिया।
इस आदेश से फेमा के तहत सभी कार्यवाहियां बंद हो गईं। यह फैसला कंपनियों को विदेशी निवेश में अनुपालन की याद दिलाता है, जहां छोटी चूक भी जांच का कारण बन सकती है। कंपाउंडिंग व्यवस्था ने व्यवसायों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाया।