
मुंबई, 6 फरवरी। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण घोषणा की कि वाणिज्यिक बैंकों को सूचीबद्ध रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) को ऋण देने की छूट दी जाएगी। यह कदम सतर्कतापूर्ण सुरक्षा मानदंडों के साथ उठाया जा रहा है।
मल्होत्रा ने बताया कि सूचीबद्ध आरईआईटी के लिए मजबूत नियामक और शासन व्यवस्था विकसित हो चुकी है, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। आरईआईटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट्स) का उद्देश्य बैंकों की पूंजी को पूर्ण हो चुके रियल एस्टेट व इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से मुक्त करना रहा है।
इन ट्रस्ट्स में निवेशक फंडिंग करते हैं, जिससे बैंकों का प्रत्यक्ष जुड़ाव कम होता है। पहले इनविट्स में बैंक फंडिंग की अनुमति मिली, लेकिन आरईआईटी को इससे वंचित रखा गया। अब आरबीआई ने समीक्षा के बाद दोनों के लिए समान दिशानिर्देश प्रस्तावित किए हैं।
गवर्नर ने कहा, “इनविट्स के मौजूदा नियमों को आरईआईटी के अनुरूप ढाला जा रहा है। ड्राफ्ट जल्द ही जनता के सुझावों के लिए जारी होंगे।”
इसके अलावा, सोने के बदले लोन देने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी-आईसीसी) को 1000 से अधिक शाखाओं पर पूर्व अनुमति की जरूरत खत्म करने का प्रस्ताव है। शहरी सहकारी बैंकों की ऋण क्षमता बढ़ाने के उपाय भी सुझाए गए।
ये बदलाव वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने और रियल एस्टेट में निवेश को गति देने वाले हैं। बाजार विशेषज्ञ इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं।