
होली का मौसम आते ही हर गली-मोहल्ले में एक धुन गूंजने लगती है, जो चार दशक पुरानी होते हुए भी ताजा लगती है। १९८० की फिल्म सिलसिला का यह आइकॉनिक गीत ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली’ आज भी उत्सव की शान बना हुआ है। आधुनिक डीजे नंबर्स भले ही भीड़ को नचाने पर मजबूर कर दें, लेकिन इस गाने जैसा दिल को छूने वाला असर शायद ही कोई पैदा कर पाए।
गीत में रंगों की मस्ती के साथ छुपी शरारतें और भावनाएं झलकती हैं। भांग के नशे में डूबे लफ्जों से अनकहे रिश्ते बोल उठते हैं। इंस्टाग्राम पर ३.८ लाख रील्स इसी गाने पर बनी हैं, खासकर ‘सोने की थाली में खीसा परोसा’ वाली पंक्ति पर। यूट्यूब पर १७१ मिलियन व्यूज के साथ यह शाहरुख खान के होली गानों से कहीं आगे है।
समय के साथ होली का स्वरूप बदला। ढोलक की थाप और गली की महफिलों की जगह अब भव्य पार्टियां और सोशल मीडिया रील्स ने ले ली। फिर भी ‘रंग बरसे’ की लोकप्रियता अटल है। भक्ति संस्करणों से लेकर भोजपुरी रीमेक तक, हर रूप में यह गूंजता है, लेकिन मूल का जादू बेमिसाल।
यह महज गाना नहीं, होली की पहचान है। राधा-कृष्ण की लीला से प्रेरित उत्साह यह जीवंत रखता है। अगली होली पर भी जब रंग छनेंगे, तो यही धुन सबसे पहले बजेगी, पीढ़ियों को जोड़ते हुए।