
नई दिल्ली। राज्यसभा में शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। उन्होंने सभी क्षेत्रों के लिए यूनिवर्सल मिनिमम एनुअल नेशनल गारंटी ‘उमंग’ लागू करने की मांग की, ताकि युवाओं में बेरोजगारी और रुकी आय की समस्या का समाधान हो सके।
ओ’ब्रायन ने कहा कि देश में हर तीन युवाओं में से एक नौकरी, पढ़ाई या प्रशिक्षण से वंचित है। नौकरी करने वालों में भी न्यूनतम वेतन की कोई गारंटी नहीं, जिससे वे कामकाजी गरीबी में जी रहे हैं। पिछले दशक में राष्ट्रीय दैनिक वेतन 176 रुपये पर अटका हुआ है, जो उपभोग को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने एक एकल, कानूनी रूप से बाध्यकारी यूनिवर्सल न्यूनतम वेतन की वकालत की, जो किसी सेक्टर, उद्योग, कॉन्ट्रैक्ट प्रकार या स्थान पर निर्भर न हो। ‘उमंग’ से हर श्रमिक को देशव्यापी न्यूनतम आय सुनिश्चित होगी।
चार बिंदुओं में अपनी योजना रखते हुए उन्होंने बाध्यकारी राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन अधिसूचना, महंगाई से जोड़ना, सरलीकरण और सभी श्रमिकों को कवरेज की मांग की।
इधर, आप सांसद संजय सिंह ने अग्निवीर योजना पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सेना में भर्ती हर युवा का सपना है, लेकिन इस योजना ने लाखों पास उम्मीदवारों को ठगा है। 2019-20 में 1.30 लाख युवाओं ने परीक्षा पास की, लेकिन भर्ती नहीं हुई।
जौनपुर के हरिंदर यादव का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि सैनिक बनने की चाहत रखने वाले को अधिकारी का नौकर बनने को मजबूर किया गया। योजना से युवाओं और देशवासियों के साथ धोखा हुआ है।
ये बहसें श्रम सुधारों और सैन्य भर्ती पर सरकार पर दबाव बढ़ा रही हैं।