
नई दिल्ली में गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही पूरी तरह धाराशायी हो गई, जब विपक्षी दल लोकसभा से जुड़े एक विवाद को सदन में लेकर आए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका न मिलने के विरोध में मल्लिकार्जुन खड़गे ने जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद का लोकतांत्रिक स्वरूप दोनों सदनों पर टिका है और किसी एक को दबाना संपूर्ण विपक्ष पर प्रहार है। खड़गे ने संविधान की द्विसदनीय व्यवस्था का उल्लेख कर सरकार को आड़े हाथों लिया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष पर प्रधानमंत्री के भाषण को बाधित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। रिजिजू ने सवाल उठाया कि अचानक यह मुद्दा क्यों? उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों सदनों के नियम अलग हैं और लोकसभा की कार्यवाही राज्यसभा में नहीं उठाई जा सकती। अगर कोई ऐसा नियम हो तो दिखाएं, ऐसा चुनौती दी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी सदन में अपनी राय रखी। उन्होंने विपक्ष के नेता के सम्मान पर जोर देते हुए कुछ शब्दों पर आपत्ति जताई, खासकर ‘लिंचिंग’ जैसे शब्द पर। उन्होंने राजस्थान में कांग्रेस शासनकाल की एक घटना का जिक्र कर दोहरा मापदंड अपनाने का ताना कसा।
विपक्षी सांसदों ने लोकतंत्र के मंदिर में आवाज दबाने का विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। पूरा सत्र शोरगुल और नारों से गूंजता रहा। एक ओर विपक्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देता रहा, वहीं सरकार ने संसदीय मर्यादा और नियमों का हवाला देकर स्टैंड लिया। यह टकराव संसद सत्र की आगे की राह को चुनौतीपूर्ण बना सकता है।