
नई दिल्ली। आसमान छूने वाले वायुसैनिक से राजनीति के निडर योद्धा बने राजेश पायलट का सफर प्रेरणादायक है। 10 फरवरी 1945 को गाजियाबाद के किसान परिवार में जन्मे राजेश्वर प्रसाद ने मेरठ विश्वविद्यालय से स्नातक किया। पढ़ाई के साथ-साथ वे मंत्रियों के बंगलों में दूध पहुंचाते, फिर स्कूल दौड़ते। 29 अक्टूबर 1966 को वायुसेना में कमीशन मिला, जहां उन्होंने ऊंचाइयों को हासिल किया।
राजनीति में इंदिरा गांधी के संरक्षण में कूदे। 1980 में भरतपुर से पहली लोकसभा जीत। नाम ‘राजेश पायलट’ चुनावी चर्चाओं से पड़ा, जब इलाके में पायलट की अफवाहें उड़ीं। किसानों के मसीहा बने, मंत्रालय से ज्यादा जनसभाओं में रचे। कांग्रेस अभियानों में पूरे देश का दौरा किया, ‘हवाई नेता’ कहलाए।
पीवी नरसिम्हा राव के संकटमोचन दल में रहे। किसान आंदोलन, जम्मू-कश्मीर मुद्दे, पार्टी कलह- हर जगह सक्रिय। सीनियर मंत्रियों से भिड़े, अखबारों में सुर्खियां बनीं- ‘पायलट की शैली पर बगावत’। इंटरव्यू में कहा, मतभेद नीतिगत, निजी नहीं।
जीप चलाने के शौकीन 11 जून 2000 को दौसा रैली से लौटते जयपुर हाईवे पर दुर्घटना में घायल। सवाई मानसिंह अस्पताल में निधन। राजेश पायलट का योगदान आज भी याद किया जाता है।