
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर सामान्य वर्ग के विरोध को करारा जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार पर भरोसा न हो तो अदालत का दरवाजा खटखटाएं।
समाचार एजेंसी से बातचीत में राजभर ने बताया कि यूजीसी समिति में 17 सामान्य वर्ग के सदस्य शामिल थे, जिन्होंने अपनी राय रखी। तैयार रिपोर्ट और लागू कानून पर अगर किसी को आपत्ति है तो सरकार 15 दिनों में कमेटी गठित कर रिपोर्ट लाएगी और कमियां दूर करेगी।
उन्होंने पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण की याद दिलाई, जब भी यही वर्ग विरोधी था। सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला। वैसे ही सामान्य वर्ग को भी आशंका हो तो शीर्ष अदालत जाएं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बोलते हुए राजभर ने कहा कि साधु-संत संगम में स्नान के लिए जाते हैं, राजनीति के मोहरे नहीं बनते। शंकराचार्य विपक्ष के साथ प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, जो राजनीति को दर्शाता है।
ममता बनर्जी पर अजित पवार निधन को लेकर हमला बोला। पायलटों और चार लोगों की मौत पर राजनीति करना गलत है। सरकार अपना काम कर रही है।
राजभर का यह बयान आरक्षण बहस को नई दिशा दे रहा है, जिसमें कानूनी रास्ते पर जोर दिया गया है।