
राजस्थान के राजसमंद जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया है। भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाएं बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं। नारों के बीच उन्होंने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की गई।
इन कार्यकर्ताओं से महिला एवं बाल विकास के अलावा कम से कम छह सरकारी विभागों का कार्य करवाया जाता है। पोषण, स्वास्थ्य जांच, प्री-स्कूल शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाने वाली इन महिलाओं को मात्र 4500 रुपये मानदेय मिलता है। कोई सुविधा नहीं, कोई संसाधन नहीं और रिटायरमेंट के बाद पेंशन का कोई प्रावधान नहीं।
कार्यकर्ता कविता बैरागी ने कहा, ‘हमें स्थायी नियुक्ति दी जाए। मानदेयकर्मी की बजाय स्थाई कर्मचारी बनाएं। अतिरिक्त विभागों का काम, अनियत समय की नौकरी और साढ़े चार हजार में परिवार कैसे चलेगा?’
मंजू कंवर ने बजट पर निशाना साधा, ‘सरकार ने आंगनबाड़ी को सबसे निचले पायदान पर रखा है। न्यूनतम 18 हजार मानदेय या वेतनभोगी घोषित करें। रिटायरमेंट पर पेंशन दें, वरना अन्याय जारी रहेगा।’
कार्यकर्ताओं ने अंतिम चेतावनी जारी की है। मांगें पूरी न हुईं तो सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले जड़ देंगे। यह आंदोलन राजस्थान में सामाजिक कल्याण कर्मियों की दुर्दशा को उजागर करता है। सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संघर्ष तेज होने के संकेत हैं।