
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापारिक समझौते ने राजनीतिक हलकों में तूफान मचा दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे किसानों के हितों के खिलाफ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने सदन में कहा कि यह डील कृषि क्षेत्र को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
गांधी के बयानों पर भाजपा नेताओं ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल पर किसानों में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने स्पष्ट किया कि इस समझौते से किसी किसान को हानि नहीं होगी। उन्होंने पीएम मोदी के 2019 में आरसीईपी से हटने का उदाहरण दिया, जब किसानों की सुरक्षा के लिए ऐसा कदम उठाया गया था। वहीं, यूपीए सरकार 2012 में इसे अंतिम रूप देने वाली थी।
पंजाब भाजपा नेता फतेह जंग सिंह बाजवा ने विपक्ष को सबूतहीन बयानबाजी का दोषी ठहराया। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि किसानों या उनके उत्पादों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार ने किसान हितों की पूरी रक्षा का प्रबंध कर लिया है।
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने बताया कि डील पूरी हो चुकी है और डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा की। 18 प्रतिशत टैरिफ पर चर्चा हुई है, लेकिन विस्तृत शर्तें अभी गोपनीय हैं। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि जल्दबाजी न करें, शर्तें सामने आने पर ही टिप्पणी करें। यह विवाद दर्शाता है कि व्यापारिक महत्वाकांक्षाओं और किसान कल्याण के बीच संतुलन कितना नाजुक है। आने वाले दिनों में डील की सच्चाई सामने आएगी।