
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने खाद्य पदार्थों में मिलावट के गंभीर मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने इसे देशव्यापी स्वास्थ्य आपदा करार देते हुए बताया कि बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक खतरे में हैं।
चड्ढा ने कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे जहरीले उत्पादों को स्वास्थ्यवर्धक बताकर बेच रही हैं। दूध में यूरिया, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, पनीर में स्टार्च व कास्टिक सोडा, आइसक्रीम में डिटर्जेंट, जूस में नकली स्वाद व रंग, तेल में मशीन ऑयल, मसालों में ईंट पाउडर व लकड़ी का बुरादा, चाय में कृत्रिम रंग, मुर्गी उत्पादों में स्टेरॉयड—यह सब रोजमर्रा की चीजों में घुलमिल गया है। मिठाइयां भी देशी घी की बजाय डालडा से बन रही हैं।
एक मां अपने बच्चे को दूध पिलाती है सोचकर कि कैल्शियम मिलेगा, लेकिन यूरिया-डिटर्जेंट का जहर भर रही है। अध्ययन बताते हैं कि 71% दूध सैंपल में यूरिया, 64% में न्यूट्रलाइजर मिले। दूध उत्पादन बिक्री से कम है। सब्जियों के 25% सैंपल 2014-2026 में मिलावटी पाए गए।
दो प्रमुख मसाला कंपनियों के उत्पाद यूरोप में कैंसरकारी कीटनाशक के कारण प्रतिबंधित, लेकिन भारत में खुले आम बिक रहे। विदेशों में पशुओं के लिए भी अयोग्य चीजें यहां परोसी जा रही हैं।
चड्ढा ने FSSAI को मजबूत करने, कर्मचारियों व लैब बढ़ाने, जुर्माने वसूलने, मिलावटी सामान का नाम बताकर रिकॉल, और भ्रामक विज्ञापनों पर रोक की मांग की। यह स्वास्थ्य रक्षा का आह्वान है।