
भोपाल में विश्व रेडियो दिवस 2026 को धूमधाम से मनाया गया। यूनिसेफ मध्य प्रदेश और आकाशवाणी के सहयोग से ‘एआई और रेडियो: बच्चों की आवाज’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में रेडियो की अहम भूमिका पर चर्चा हुई। विशेष रूप से आपदाओं और स्वास्थ्य संकटों में रेडियो ने समुदायों का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया।
यूनिसेफ मध्य प्रदेश फील्ड ऑफिस के प्रमुख विलियम हैनलोन ने कहा कि बाल अधिकारों के प्रचार-प्रसार में रेडियो का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने बताया कि संकट की घड़ियों में रेडियो सूचना का सबसे विश्वसनीय और सुलभ स्रोत साबित हुआ है। छात्रों, प्रस्तुतकर्ताओं, मीडिया विशेषज्ञों के साथ संवाद में उन्होंने मध्य प्रदेश में रेडियो की स्थायी भूमिका पर प्रकाश डाला।
हैनलोन ने एआई के तेज विकास के बावजूद जिम्मेदार संचार में मानवीय निर्णय की आवश्यकता पर बल दिया। आकाशवाणी के कार्यक्रम प्रमुख राजेश भट ने 90 वर्षों की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि हर चुनौती ने नवाचार को जन्म दिया। निरंतरता, नैतिकता और विश्वसनीयता रेडियो की ताकत हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।
यूनिसेफ के अनिल गुलाटी ने रेडियो को ‘मन का रंगमंच’ करार दिया। कोविड-19 के दौरान इसकी सकारात्मक भूमिका सबने देखी। डिजिटल युग में भी रेडियो ने अपना मूल स्वरूप बनाए रखा।
छात्रों ने एआई से उत्पन्न गलत सूचनाओं और पॉडकास्ट के दौर में रेडियो की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एआई डेटा पर निर्भर है और इसमें संपादकीय परिश्रम की कमी है। कार्यक्रम ने रेडियो की अपरिहार्यता को रेखांकित किया।