
पुणे के मुंढवा क्षेत्र में 40 एकड़ सरकारी जमीन के कथित अवैध सौदे के मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने 1886 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में पेश कर दी है। इस दस्तावेज में पावर ऑफ अटॉर्नी धारक शीतल तेजवानी पर मुख्य आरोप है कि उन्होंने राज्य सरकार की जमीन होने के पूर्ण ज्ञान के बावजूद अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी के साथ बिक्री दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए।
अमाडिया कंपनी के साझेदार पार्थ पवार, जो दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पुत्र हैं, का नाम प्रारंभिक जांच में प्रत्यक्ष रूप से जुड़ नहीं सका, हालांकि वे साझेदार के रूप में दर्ज हैं। चार्जशीट में कंपनी के अन्य साझेदार दिग्विजय अमरसिंह पाटिल और निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले के खिलाफ ठोस आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि सरकारी संपत्ति को निजी बताकर धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से लेन-देन किया गया।
ईओडब्ल्यू के सूत्रों के अनुसार, जांच प्रक्रिया अभी जारी है और नए साक्ष्यों के आधार पर पूरक चार्जशीट दाखिल हो सकती है। सभी दस्तावेजों, अधिकारियों और निजी फर्मों की भूमिका की गहन पड़ताल हो रही है।
यह मामला राजनीतिक गलियारों में आग की तरह फैल चुका है। विपक्ष सरकार पर हमलावर है, जबकि अजित पवार ने साफ कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे। यह घटना भूमि प्रबंधन में व्याप्त कमियों को उजागर करती है।