
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने जवाहarlाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हाल की नारेबाजी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने साफ कहा, ‘जेएनयू में इस तरह की नारेबाजी सही नहीं है।’ यह बयान छात्र राजनीति और राष्ट्रवाद के बीच चल रही बहस को नई गति दे रहा है।
विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान उग्र नारे लगाए गए, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया। चतुर्वेदी ने जोर देकर कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन यह राष्ट्रीय एकता को ठेस नहीं पहुंचा सकती।
‘छात्रों को अपनी बात रखने का हक है, लेकिन घृणा फैलाने वाले नारे अस्वीकार्य हैं,’ उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा। जेएनयू का इतिहास विचारधारात्मक टकरावों से भरा पड़ा है, जहां 2016 की घटनाओं से लेकर अब तक विवाद थमे नहीं।
चतुर्वेदी का यह रुख राजनीतिक दलों के उस समूह को मजबूत करता है जो परिसरों में अनुशासन की मांग कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को अब शांति बहाल करने की चुनौती है, जबकि सांसद ने छात्रों से रचनात्मक संवाद की अपील की।
यह विवाद भारत के युवाओं की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। क्या जेएनयू जैसे संस्थान राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे या विभाजन को बढ़ावा? चतुर्वेदी की चेतावनी समय रहते सोचने का संकेत है।