
इंदौर में दूषित पानी से हो रही मौतों ने पूरे शहर को शोक की लपेट में ले लिया है। इसी बीच राजनीतिक बवाल मच गया है। कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की टिप्पणी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक सभा में कहा था कि मौतों का कारण केवल दूषित पानी ही नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से पानी की गुणवत्ता जांचने की सलाह दी। इस बयान पर विपक्ष ने तीखा प्रहार किया है। चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘लोगों की जान जा रही है और नेता ऐसी असंवेदनशील बातें कर रहे हैं। यह बेहद दुखद है।’
शहर के कई इलाकों में पानी में गंदगी की शिकायतें वर्षों से हैं। नालियों का पानी स्वच्छ जल लाइनों में घुल रहा है। अस्पतालों में डायरिया और हैजा के मरीजों की भरमार है। कम से कम दर्जन भर मौतें हो चुकी हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने पानी उबालने की सलाह दी है, लेकिन लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। कांग्रेस ने उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग की है।
भाजपा ने सफाई दी कि जांच जारी है और जल्द सुधार होंगे। लेकिन चतुर्वेदी का हमला सरकार को घेरने में कामयाब रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह विवाद तेज हो गया है।
इंदौरवासी साफ पानी और जिम्मेदार शासन चाहते हैं। यह संकट प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है। उम्मीद है कि राजनीति से ऊपर उठकर समाधान निकलेगा।