
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के प्रथम चरण का शुक्रवार को समापन हुआ, लेकिन हंगामे और अवरोधों के बीच शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार को लोकतंत्र के अपमान का दोषी ठहराया। उनके अनुसार, यह सत्र इतिहास के काले पन्नों में दर्ज होगा।
चतुर्वेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन सुचारू रूप से नहीं चला। महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस की गुंजाइश ही नहीं मिली। उन्होंने कहा, ‘आज बजट सत्र का पहला भाग समाप्त हो रहा है, लेकिन अपेक्षित चर्चाएं नहीं हुईं। यह लोकतंत्र का दुरुपयोग है।’
विशेष रूप से उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख की किताब के अंश पढ़ने से रोके जाने का उल्लेख किया। यह किताब गलवान संघर्ष और सैन्य फैसलों पर केंद्रित है। पूर्व आर्मी चीफ ने अपनी सेवा पर कई पुस्तकें लिखीं, फिर भी इसे राष्ट्रविरोधी ठहराकर रोका गया।
प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में अनुपस्थित रहने, महिला सांसदों पर टिप्पणियों और विपक्षी सदस्यों के निलंबन पर भी उन्होंने निशाना साधा। केंद्रीय बजट को ‘आमजन के लिए असहज’ बताते हुए महंगाई और जन समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
बांग्लादेश से संबंधों में खटास का जिक्र करते हुए अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले और लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताई। इस सत्र ने संसदीय परंपराओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।