
नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक क्षण आने वाला है। राष्ट्रपति भवन के केंद्रीय प्रांगण में सोमवार को ‘राजाजी उत्सव’ के तहत भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण होगा। यह समारोह स्वतंत्र भारत के इस महान सपूत को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 131वें संस्करण में इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान लाल किले से दिए ‘पंच-प्राण’ आह्वान का जिक्र किया, जिसमें गुलामी की मानसिकता त्यागना प्रमुख है। राष्ट्रपति भवन का यह कदम उसी दिशा में महत्वपूर्ण है, जहां देश औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाकर भारतीय संस्कृति के प्रतीकों को स्थान दे रहा है।
राजाजी का सार्वजनिक जीवन सेवा का प्रतीक था। वे सत्ता को पदवी नहीं, अपितु जनसेवा का माध्यम मानते थे। उनका संयमित आचरण और स्वतंत्र चिंतन आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है।
आजादी के बाद भी ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां राष्ट्रपति भवन में खड़ी रहीं, जबकि स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को उपेक्षित रखा गया। प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा का विशेष उल्लेख किया, जिसे अब राजाजी की मूर्ति से प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
उत्सव के हिस्से के रूप में 24 फरवरी से 1 मार्च तक एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। इसमें राजगोपालाचारी के जीवन, संघर्षों और योगदानों को दर्शाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों से प्रदर्शनी देखने और राजाजी की विरासत से परिचित होने का आह्वान किया है।
यह अनावरण न केवल इतिहास का सम्मान है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा।