
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दो दिवसीय दौरे के साथ इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) 2026 की भव्य शुरुआत हो रही है। सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर के रूप में वे इस वैश्विक नौसैनिक समारोह का निरीक्षण करेंगी, जो भारत की समुद्री क्षमता और मित्र राष्ट्रों के साथ एकजुटता को रेखांकित करता है।
कार्यक्रम का आगाज राष्ट्रपति भोज से होगा, उसके बाद बुधवार को विशाखापट्टनम तट पर 70 युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानों की परेड का निरीक्षण होगा। यह आयोजन समुद्री सहयोग, शक्ति प्रदर्शन और क्षेत्रीय संप्रभुता की मिसाल पेश करेगा। राज्यपाल जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी उपस्थित रहेंगे।
भारतीय नौसेना के मुताबिक, आईएफआर वैश्विक नौसैनिक मित्रता का प्रतीक है। भारत ने 2001 में मुंबई और 2016 में यहीं इसकी मेजबानी की थी। मुख्य आकर्षण रहेगा आईएनएस विक्रांत, जो ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका निभा चुका है। इस विमानवाहक पोत ने नौसेना की आक्रामक रणनीति को मजबूत किया, जिससे शत्रु को पीछे हटना पड़ा।
इसके साथ अंतरराष्ट्रीय सिटी परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसंपर्क आयोजन समुद्री विरासत का जश्न मनाएंगे। साथ ही, मिलन-26 बहुपक्षीय अभ्यास बंगाल की खाड़ी में चल रहा है, जिसमें 135 से अधिक देश हिस्सा ले रहे हैं। यह अभ्यास सहयोग बढ़ाने और संयुक्त अभियानों पर केंद्रित है।
शहर में इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम भी हो रहा है। भारत पहली बार तीन बड़े समुद्री आयोजनों की मेजबानी कर रहा है। इतिहास में 2001 में राष्ट्रपति नारायणन ने आईएनएस सुकन्या से और 2016 में राष्ट्रपति मुखर्जी ने आईएनएस सुमित्रा से निरीक्षण किया था, जिसमें 50 देशों के 100 जहाज जुटे थे।