
झारखंड के जमशेदपुर में गुरुवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कदमा मरीन ड्राइव में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के लिए भूमि पूजन किया। अपने भावुक संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की कृपा संपूर्ण मानवता पर समान रूप से बरसती है, बिना किसी भेदभाव के।
‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष के साथ शुरू हुए भाषण में राष्ट्रपति ने महाप्रभु के दरबार को जाति-पात या वर्ग भेद से मुक्त बताया। उन्होंने प्रसिद्ध कहावत ‘जगन्नाथ के भात, जगत पसारे हाथ’ का जिक्र कर सामूहिक भोज की परंपरा को एकता का प्रतीक कहा, जहां सभी समरसता का अनुभव करते हैं।
इस शिलान्यास को उन्होंने ईश्वरीय संयोग करार दिया, ठीक वैसे ही जैसे रथयात्रा में प्रभु स्वयं रथ चुनते हैं। उनका विश्वास है कि यह केंद्र सामाजिक जागृति का स्रोत बनेगा और नीलांचल के स्वामी की कृपा जमशेदपुर में स्थायी होगी।
झारखंड की पूर्व राज्यपाल ने जगन्नाथ संस्कृति को जनजातीय व गैर-जनजातीय परंपराओं के अनुपम संगम के रूप में चित्रित किया। सबर राजा विश्ववासु और ब्राह्मण विद्यापति की कथा से उन्होंने एकात्मता की परंपरा को रेखांकित किया।
‘दारुब्रह्म’ स्वरूप को प्रकृति रक्षा का संदेश बताते हुए उन्होंने इसे आदिवासी चेतना से जोड़ा। कार्यक्रम में झारखंड गवर्नर संतोष गंगवार, सीएम हेमंत सोरेन, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उपस्थित थे।
ट्रस्ट अध्यक्ष एसके बेहरा ने बताया कि 100 करोड़ की इस 2.5 एकड़ परियोजना में 1.5 एकड़ में मुख्य मंदिर व 1 एकड़ में सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। पुरी शैली से प्रेरित मंदिर चार वर्षों में, केंद्र दो वर्षों में तैयार होगा। यहां गीता-भागवत अध्ययन से युवाओं में नैतिक मूल्यों का संचार होगा।