
नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की भव्यता के एक दिन बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में एक यादगार आयोजन किया। मंगलवार को उन्होंने परेड के प्रमुख सहयोगियों से गहन संवाद किया, जो देश की एकता और विविधता को जीवंत बनाने वाले थे।
कार्यक्रम में लद्दाख, झारखंड और जम्मू-कश्मीर से आए छात्रों के समूह, आदिवासी प्रतिनिधि, झांकी कलाकार, ट्रैक्टर चालक, एनएसएस स्वयंसेवक तथा एनसीसी कैडेट्स ने शिरकत की। सभी ने राष्ट्रपति के समक्ष अपने अनुभव साझा किए, जो राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बने।
राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, पूरे दिन चली इस मुलाकात में मुर्मू ने 2026 गणतंत्र दिवस से जुड़े आदिवासी अतिथियों, विभिन्न राज्यों की झांकियों के कलाकारों और अन्य प्रतिभागियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इनकी भागीदारी ने पर्व को भव्य और समावेशी रूप प्रदान किया।
इससे पूर्व सोमवार को पारंपरिक ‘एट होम’ समारोह आयोजित हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन जैसे प्रमुख नेता उपस्थित थे। 1950 से चली आ रही यह परंपरा संविधान अपनाने की स्मृति में मनाई जाती है।
इस बार यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी ने भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को मजबूत किया। निमंत्रण पत्रों में उत्तर-पूर्वी राज्यों की सांस्कृतिक धरोहर को चित्रित किया गया, जो विविधता का प्रतीक बना।
राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक परिसर में अतिथियों ने परस्पर बधाई दी और परेड की सफलता पर चर्चा की। राष्ट्रपति मुर्मू का यह प्रयास राष्ट्र निर्माण में हर व्यक्ति की भूमिका को रेखांकित करता है।